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मंगलवार, 23 जून 2009

बुन्देलखंड में फ़िर सूखे जैसे हालात : किसानो की नींद हराम


एक बार फ़िर से बुन्देलखंड में सूखे जैसी नौबत की संभावना बन रही है। यहाँ भीषण गर्मी में आमजन, पशु सब अकुला रहे है। गर्मी के तल्ख तेवर कम होने का नाम ही नहीं ले रहे। मानसून के आने के बाद भी वर्षा न होने से किसानों के माथे में चिंता की लकीरें पड़ गई है। सभी यह सोच कर दहल जाते है कि क्या इस वर्ष भी पिछले वर्षो की भांति सूखे की भयावह स्थिति से रूबरू होना पड़ेगा। किसान अब बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।गर्मी इस वर्ष अपने पूरे शबाब पर है। जिससे धरती से जल स्तर खिसकने लगा है। लगातार चार साल से बुंदेलखंड के किसानों को सूखे की मार झेलने के बाद पिछले वर्ष हुई बारिश ने कुछ राहत तो जरूर पहुंचाई थी। मगर इस वर्ष मानसून आने के बाद भी बारिश न होने से किसानों को फिर वहीं पुराने दिन याद आने लगे है। रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिये ग्रामीण अंचलों में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गये है। महोबा जिले के कुलपहाड़ के मां बाघ विराजन मंदिर में पिछले एक सप्ताह से संकीर्तन और पूजा पाठ का दौर चल रहा है। किसान को भी फसल बुवाई के लिये बरखा रानी का इंतजार है। पहले 15 जून से ही आसमान से बारिश होने लगती है। जिससे किसान अपने खेतों में खरीफ फसल की बुवाई करने लगता था। लेकिन इस वर्ष अब तक बारिश न होने से किसानों में चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा सकती है। सभी मायूस हो बस इंद्रदेव की मेहरबानी का इंतजार कर रहे है। लेकिन वह यह सोचकर दहल जाते है कि क्या इस वर्ष भी पिछले चार वर्षो की भांति सूखे की भयावह स्थिति से रूबरू होना पड़ेगा। सभी किसान अब बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे है। बुंदेलखंड मे उद्योगों का अभाव होने के कारण यहाँ का निवासी पूरी तरह खेती पर निर्भर है इसलिए वह मौ़सम में थोडी सी अनियमितता से ही घबरा जाता है। इसीलिए यहाँ की क्षेत्रीय पार्टी यानि बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी सदैव सरकारों से मांग करती आ रही है कि बुंदेलखंड मे औद्योगिक विकास की दरकार है ताकि यहाँ का किसान कृषि का विकल्प तो पा सके.

सोमवार, 22 जून 2009

बुन्देलखंड : भीषण गर्मी में गहराया पेयजल संकट

जैसे जैसे मानसून में देरी हो रही है वैसे वैसे बुन्देलखंड के लोगो और जानवरों की जिजीविषा दम तोड़ रही है। असल में पिछले कई वर्षो के सूखे का सामना कर चुके बुन्देलखंड वासी पुनरावृत्ति नही चाहते है ,किंतु धीरे धीरे हालात वैसे ही बनते जा रहे है। भीषण गर्मी में पेयजल संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। बुन्देलखंड के सभी जिलों में लोगों का पेयजल के लिये संघर्ष जारी है। सुबह से ही हैण्डपंपों पर पानी भरने वालों की लंबी लाइन लग जाती है और यह सिलसिला देर रात तक अनवरत जारी रहता है। बड़ों की छोड़े बच्चे भी पानी की जुगाड़ के लिये परेशान रहते है। प्रचंड गर्मी में जानवरों को भी अपना गला तर करने के लिये खासी मशक्कत करना पड़ रही है।
उमस भरी गर्मी में पेयजल संकट विकराल होता जा रहा है। जलस्तर नीचे खिसकने से कुएं व हैण्डपंप भी धीरे-धीरे साथ छोड़ रहे है। जहां हैण्डपंप सही है वहां पानी भरने वालों की लंबी लाइन लगती है। जो एक बार पानी भर लेता है उसका नंबर फिर घंटों बाद ही आ पाता है। मुख्यालय के नयापुरा नैकाना, समदनगर, पतीबरा, बड़ीहाट, शेखूनगर आदि मुहल्लों में लोगों का बूंद-बूंद पानी के लिये संघर्ष जारी है। सर्वाधिक परेशानी चित्रकूट के पाठा क्षेत्र, महोबा और जालौन में है।कई जगह ऊंचाई वाले इलाके होने के कारण जल संस्थान की आपूर्ति भी नहीं पहुंच पाती। जिससे यहां के वाशिंदे पूरी तरह हैण्डपंपों पर आश्रित है। हैण्डपंपों में पानी भरने वालों की काफी भीड़ जमा होती है। सुबह 4 बजे से ही लोग हैण्डपंप से पानी भरने लगते है और यह सिलसिला देर रात तक जारी रहता है। जहाँ जल संस्थान द्वारा टैंकरों से जलापूर्ति दी जा रही वहां कुछ प्रभावशाली लोग उसमें अपना कब्जा जमा लेते है। आम लोगों का नंबर आते-आते टैंकर खाली हो जाता है। जिससे पेयजल के लिये खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। कमोवेश यही हाल समूचे बुन्देलखंड का है। आमजन की तो छोड़े जानवरों को भी गला तर करने को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उनके लिये चरही तो बनाई गई मगर उनमें पानी नहीं भरा गया। बेचारे बेजबान जानवर अपनी प्यास बुझाने को दर-दर भटकते रहते है।
 
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